સોમવાર, 13 મે, 2013

એની નજરમાં સવાલો ઘણા છે

એની નજરમાં સવાલો ઘણા છે,
ને મારા હૃદયમાં જવાબ ઘણા છે.

કે નીન્દ્રાએ આંખોનું ઘર છોડીયું છે,
છતાં પણ હજુ દિલમાં સપના ઘણા છે.

મારા હૃદયની પીડા બહુ જ કઠીન છે,
આમ તો દુનિયામાં દર્દો ઘણા છે.

હજુ મન મંદિરમાં તારી યાદ આવે છે,
આમ તો ઉજવવા તહેવારો ઘણા છે.

બધા પોતાના થઈને જ મને મળે છે,
તોય એ ભીડમાં પારકા ઘણા છે.

સુરજ પાસે હોવાથી જ દુનિયા પૂજે છે,
નહિ તો અંતરીક્ષમાં સિતારા ઘણા છે.

મારે મન તો પ્રેમ જ પૂજા ઈબાદત છે,
આમ તો દુનિયામાં ધર્મો ઘણા છે.

'આનંદ' દિલના દર્દ ખાનગી હોય છે,
મેહફીલમાં એમ તો શ્રોતા ઘણા છે.

वो प्यार करती है पर बताती नहीं है

वो प्यार करती है पर बताती नहीं है,
वो मुजपे मरती है पर जताती नहीं है,
मेरे हर दर्द मे हमदर्द है वो लेकिन,
फिरभी ईश्क का मतलब समजती नहीं है.

तलवार और बन्दुक से डरती नही है,
जुल्मो के सामने भी ज़ुकती नहीं है,
कभी फुलोसी नाजुक कभी फौलाद जैसी,
मोहबत बारूद से भी मिटती नहीं है.

दुनिया प्यार का मतलब जानती नहीं है,
दिल के गेहरे रिश्तों को ये मानती नहीं है,
इसके लिये मोहबत वो गुनाह है यारो,
जिसे ये कभी भी माफ करती नहीं है.

वो पगली अपने दर पे मेरा इन्तेज़ार करती है,
पर अपने दर से कभी आगे निकलती नहीं है,
उसके पैरोमे रिश्तों का बंधन है ऐसा
जिसे वो चाहके भी तोड़ सकती नहीं है.

आंसुओ को पीनेसे भी नशा होता है,
ये राज़ की बात वो कहती नहीं है,
जब से पी है उसके ईश्क की शराब
लाख कोशिश करने पर भी उतरती नहीं है.

तेरा नाम लेता हु मैं तस्बिके पारो मे,
पर मेरा खुदा मुझसे नाराज नहीं है,
'आनंद' उसने ही मोहबत को इजाद किया है,
उसकी इबादत मोहबत से जुदा नहीं है.

હે ઈશ્વર ! હે પરમ કૃપાળુ ! આટલું અમને દેજે

બીજાને મદદરૂપ થઇ શકીએ એવી પ્રાર્થના કરતી કવિતા...

હે ઈશ્વર ! હે પરમ કૃપાળુ ! આટલું અમને દેજે,
કોઈનાં દિલની આગ બુઝાવવા પાણી અમને કરજે,
કોઈના મનને ઠંડક દેતી વાણી અમને દેજે,
હે ઈશ્વર !

કોઈના ઝખ્મોનો મરહમ અમને બનવા દેજે,
કોઈ એકલ અનાથનો હમદમ અમને બનવા દેજે.
હે ઈશ્વર !

કોઈ નિરાધારને આધાર હાથ અમને કરજે,
જગથી રૂઠેલા એવા કોઈનો સાથ અમને દેજે.
હે ઈશ્વર !

કોઈની આંખના આંસુઓમાં ભાગ અમને દેજે,
કોઈ ભૂખ્યા પેટે લાગેલી આગ અમને દેજે.
હે ઈશ્વર !
સબંધો જે સાંધતા શીખે એવું જીવન દેજે,
કોઈને દિલની ફોરમ દેતું ઉપવન અમને દેજે.
હે ઈશ્વર !

હે ઈશ્વર તારા ચરણોની રાખ અમને કરજે,
'આનંદ' તારા મોતે રડતી આંખ અમને દેજે.
હે ઈશ્વર !

ये कोई आम बात नहीं

मुजको आया हुआ एक सुनहरा सपना जो सच होना आसान नहीं.....

मुजको सुनेहरे ख़्वाब आना,
और सपने सारे सच हो जाना,
ये कोई आम बात नहीं.

बिना रिशवत के काम हो जाए,
और नेता सारे सुधर जाए,
ये कोई आम बात नहीं.

गरीब के तन पर पुरा कपडा ?
महेलो के आगे उसका जोपडा ?
ये कोई आम बात नहीं.

कहीं मिले एक बेदाग़ बंदा ?
धर्म करे बंध अपना धंधा ?
ये कोई आम बात नहीं.

गद्दारों को दी जाए फांसी,
हर लड़की हो रानी जांसी.
ये कोई आम बात नहीं.

पुलिसवाला रिशवत ना ले,
अपनी वर्दी की आन बचाले,
ये कोई आम बात नहीं.

न्यायालयमे न्याय मिले ?
वकील सिर्फ सच ही बोले ?
ये कोई आम बात नहीं.

शिक्षा का व्यापार न हो ?
कोई बालक मजदुर न हो ?
ये कोई आम बात नहीं.

'आनंद' देश महान बने,
फिर सच्चा हिंदुस्तान बने,
ये कोई आम बात नहीं.

आग और पानीमें भी जी शकता हु मैं

आग और पानीमें भी जी शकता हु मैं,
दर्द के सातो सागर को पी शकता हु मैं

हां हजारों दुश्मनों की फौज सामने है,
पर तेरा साथ पाकर हर जंग जीत शकता हु मैं

दिल बहोत रोता है तुम्हारी याद आने से,
पर दिल के ज़ख्म छुपाके हँस शकता हु मैं

कातिल का हर ज़ुल्म बड़े शौक से सेह्ता हु मैं,
वरना अपनी शमशेर भी उठा शकता हु मैं

तुफानो के सिनेपे सर रखके सोता हु मैं
दुश्मनों के ज़ख्मो पर चुपके से रोता हु मैं

'आनंद' कोई हमराज़ सच्चा नहीं मिलता,
जिसे दिल के ज़ख्मो के राज़ बता शकता हु मैं

મંગળવાર, 23 એપ્રિલ, 2013

मासूमियत का खून

दिल्ही मे मासूम बच्ची के साथ हुए दुष्कृत्य की पीड़ा उस बेटी की जुबान से...
में मेरे पापा की प्यारी बेटी
में मेरी माँ की दुलारी बेटी
भैया के हाथ की रक्षा डोरी
दादा दादी के दिल की लाडली बेटी

मुजको माँ ने दूध पिलाया
पापा ने खूब लाड लड़ाया
जब जब भैया ने रुलाया
चोकलेट देके मुझे मनाया

में सजा सजाया ख़्वाब माँ का
में अनोखा रुआब पापा का
प्यारा खिलौना में भैया का
में तो हु वरदान खुदा का

इंसानियत भी शर्माती है
हेवानियत  भी घबराती है
मार डालो वासना के हेवानो को
जो मासूमियत का खून करते है

मेरे आंसू को कब पोछोगे ?
कब अपनी नींद से जागोगे ?
कब तुम मेरा बदला लोगे ?
कब मेरा इन्साफ करोगे ?

कब तक में अत्याचार सहु ?
कब तक में घुट घुट के रहू ?
मेरा दर्द में किससे कहु ?
पीना  पड़ेगा कब तक लहू ?

मेरे आंसू का हिसाब न होगा,
चमन तुम्हारा आबाद न होगा,
'आनंद' दर्द उसका क्या बताए ?
सारा ज़हा उसकी आह से बरबाद होगा ।
                                                  - वाला प्रतिक